Financial Literacy in India – Banking System किसी भी देश का सबसे बुनियादी Financial System होता है, जो कि पूरी तरह से लोगों के पैसों यानी Public Finance पर ही आधारित होता है क्योंकि Banking System के अन्तर्गत बुनियादी रूप से आम लोगों की बचत (Savings) का धन जमा होता है
और उसी धन को अन्य लोगों को उन लोगों को Loan के रूप में दिया जाता है, जो कि अपना कोई छोटा-मोटा Business लगाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त धन नहीं है, अथवा उन लोगों को दिया जाता है, जिनके पास अपनी कोई अच्छी नौकरी या Business तो है, लेकिन किसी अन्य प्रकार की जरूरत जैसे कि बच्चों के Higher Education, Marriage, नया घर या नई कार आदि के लिए उनके पाए एक-मुश्त रकम नहीं है।ऐसे में Bank वह स्थान होता है, जहां से लोग अपनी जरूरतों या इच्छाओं को पूरा करने के लिए एक Reasonable Interest Rate पर Loan ले सकते हैं।
किसी देश का Banking System जितना मजबूत होता है, वह देश भी उतना ही मजबूत होता है क्योंकि वर्तमान समय में देश की आर्थिक स्थिति से ही देश की ताकत को मापा जाता है। जबकि देश का Banking System तभी मजबूत हो सकता है, जबकि उस देश के ज्यादा से ज्यादा लोग Banking System से जुड़े हों और Banking System का उपयोग करते हों।
लेकिन हमारे देश की स्थिति ये है कि आजादी के लगभग 6 दशक बाद तक भी सभी भारतीय लोगों के Saving Bank Account तक नहीं हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में लगभग 24 करोड़ 67 लाख परिवारों में लगभग 100 करोड़ से ज्यादा लोग रहते थे, लेकिन आजादी के लगभग 65+ सालों बाद भी इनमें से केवल 14 करोड़ 78 लाख लोग ही भारत की Banking Services से जुड़ पाए, जबकि भारतीय गाँवों में रहने वाले लोगों के भारतीय Banking System के साथ Interaction की स्थिति तो और भी दयनीय है।
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी के लगभग 65% यानी लगभग 70 करोड़ से ज्यादा लोग गाँवों में रहते थे और भारत के गॉंवों में बसने वाले 16 करोड़ परिवारों में रहने वाले इन 70 करोड़ से ज्यादा लोगों में से भी केवल 9 करोड़ 14 लाख लोगों के पास ही अपना Bank Account था। जबकि 2012 में World Bank के द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार 2012 तक भारत देश में रहने वाले सभी भारतीयों में से केवल 35% लोगों के पास ही Bank Account थे और इन में से भी केवल 8% लोगों ने ही Bank से किसी प्रकार का छोटा-मोटा Loan ले रखा था।
जिस देश में 65+ सालों में देश की आबादी के कुल 25% लोग भी उस देश के सबसे बुनियादी Financial System यानी Banking System से नहीं जुड़ पाए, वह देश कैसे आर्थिक तरक्की कर सकता है, कैसे गरीबी से उबर सकता है?
क्यों कम है भारत में Banking System व अन्य Financial Services की पहुँच?
इस सवाल का जवाब 2013 में 16 से 64 वर्ष तक की उम्र के लोगों पर किए गए इस सर्वे में मिला, जिसके अनुसार Financial Literacy यानी Banking, Saving और Investing की समझ के मामले में भारत, एशिया पेसिफिक इलाके के 16 देशों में भी सबसे आखिरी पायदान पर है।
क्योंकि भारतीय लोगों को पता ही नहीं है कि पैसों से सम्बंधित भी कुछ पढ़ाई, कुछ जानकारी होती है, जिसे सीखा-समझा जा सकता है और हमेंशा पैसा कमाने के लिए ही काम नहीं करना होता, बल्कि पैसे से पैसा भी बनाया जा सकता है। अर्थात उनका पैसा भी उनके लिए काम कर सकता है, उनके लिए कमाई कर सकता है।
Financial Literacy के अन्तर्गत बहुत सारे Tools व Instruments शामिल होते हैं, लेकिन सम्पूर्ण Financial Literacy की शुरूआत होती है Banking System से क्योंकि Banking System ही सभी प्रकार के Financial Systems के Center में होता है और ज्यादातर भारतीय लोगों को यदि किसी तरह के Financial Instrument के संदर्भ में थोड़ी-बहुत समझ है भी, तो वो मात्र Banking ही है।
यदि कोई सर्वे किया जाए और उस सर्वे में भारतीयों से पूछा जाए कि वे अपनी बचत को बढ़ाने यानी पैसे से पैसा बनाने के लिए क्या करते हैं, तो ज्यादातर भारतीय लोगों को अपनी बचत के पैसों को Property में Invest करने अथवा Bank FD में Deposit करने से आगे कुछ पता ही नहीं है और जो इनसे थोड़ा ज्यादा जानते हैं, वे भी ज्यादा से ज्यादा Gold में Invest करने से अधिक कुछ नहीं जानते। लगभग 99% लोग, जो कि अपना Life Insurance करवाते हैं, वे तो उस Insurance को ही अपना Investment समझते हैं, जबकि सच्चाई ये है कि Insurance, Investment है ही नहीं।
जब हमारे देश में आजादी के 65+ सालों बाद अभी तक सभी लोगों का Saving Bank Account तक नहीं है, यानी अभी तक हमारे देश के ज्यादातर लोगों को Basic Banking Services की समझ भी नहीं है, तो Mutual Funds, Gold ETF, Stock Market जैसी Advanced Savings and Investment की योजनाओं तथा Insurance के बारे में उन्हें कितना ज्ञान होगा, हम केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं जबकि अमेरिका जैसे देशों में प्रत्येक व्यक्ति की आय का औसतन 35% से ज्यादा तो Insurance Premium के रूप में ही कट जाता है, क्योंकि वहाँ का आम व्यक्ति तक जानता है कि Insurance और Investment का क्या महत्व है जबकि हमारे देश के Master Degree प्राप्त पढ़े-लिखे लोगों के लिए भी Insurance व Investment दोनों एक ही चीज के दो नाम हैं।
2013 के ही आंकड़े बताते हैं कि भारत के लगभग 25 करोड़ परिवारों में 10% से भी कम यानी लगभग 2.5 करोड़ परिवार ही अपनी Savings काे Mutual Fund Schemes में Invest करते थे। इनमें भी 40% से ज्यादा Mutual Funds Investors, हमारे देश के कुल 4-5 Metro Cities (दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, मद्रास जैसे बड़े शहरों) से हैं, जबकि हमारे देश में 29 राज्य, 7 केन्द्र-शासित प्रदेश, 685+ जिले, 5560+ तहसील और हर तहसील मे औसतन 10 से 15 गांव हैं। क्या हम अंदाजा लगा सकते हैं कि 50000+ छोटे-मोटे गांवों-शहरों से बना हमारा देश, Financially कितना Educated है?
हमारे देश में Mutual Funds Industry की Growth दुनिया की दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी काफी कम है। भारत में Mutual Funds Industry की Growth, 15% सालाना से भी कम है, जो कि देश की आबादी को देखते हुए न के बराबर है, जबकि ब्राजील में यही Growth 40% और साउथ अफ्रीका में 33% सालाना के आसपास है, जिनकी आबादी भारत की तुलना में कई गुना कम है।
इससे भी बुरा हाल ताे हमारे देश में Stock Market Investment का है। Stock Market का नाम सुनते ही भारतीयों का Reaction तो ऐसा होता है जैसे बिच्छु ने डंक मार दिया हो। भारतीयों के लिए तो Stock Market एक तरह से Government Authorized Casino यानी एक सरकारी मान्यता प्राप्त जुआखाना है। जिसने भी Stock Market का नाम सुना है, वह उसकी बुराई ही करता है, चाहे अपनी पूरी जिन्दगी में वह किसी Stock Broker के Office के सामने से भी न गुजरा हो। जबकि सच्चाई ये है कि किसी भी देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका आंकलन उस देश के Stock Market में होने वाले लेनदेन के आधार पर ही किया जाता है।
सन 1982 के आसपास हमारे देश में BSE (Bombay Stock Exchange) के नाम से मात्र 100 अंक से Stock Market की शुरूआत हुई थी, जो आज बढ़ते हुए 25000 तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी भी हमारे सम्पूर्ण देश के सभी लोगों द्वारा सभी तरीकों से जितना लेनदेन हमारे Stock Market में होता है, हर रोज उससे कई गुना ज्यादा Foreign Investor हमारे Stock Market में Invest करते हैं। दुनियॉं का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के बावजूद, हमारे देश की अर्थव्यवस्था को जापान जैसे छोटे से देश में होने वाली घटनााऐं प्रभावित करती हैं क्योंकि हमारे Stock Market में हम भारतीयों से ज्यादा पैसा जापान जैसे छोटे-छोटे देश Invest करते हैं।
एक आँकड़े के मुताबिक 2011 तक भारत में लगभग 25 करोड़ परिवारों में से केवल 2% परिवार ही अपनी Savings को Share Market में Invest करते थे और इनमें से भी 80% Investors देश के केवल 10 बड़े शहरों में से हैं और इस स्थिति में पिछले 5 सालों में भी कोई विशेष सुधार नहीं आया है। अब जिस देश की अर्थव्यवस्था का आंकलन करने वाले Stock Market को ही सरकारी जुआघर माना जाता रहा हो, उस देश के लोगों का उस देश की आर्थिक तरक्की में कितना सहयोग है, अन्दाजा लगाना कठिन नहीं है।
ये आँकड़े बताते हैं कि Mutual Funds और Equity Market को लेकर भारत के छोटे शहरों और गाँवों में जानकारी का कितना अभाव है और Investment को लेकर हमारे देश में जो थोड़ी बहुत जानकारी है भी, वो भी केवल परंपरागत Fixed Deposits और Life Insurance तक ही सीमित है, जिसे भारतीय लोग अपना Investment समझते हैं।
क्या करना चाहिए Financial Literacy in India के लिए?
एक ही जवाब है इस सवाल का।
Financially Literate होईए और भारत की अर्थव्यवस्था में अपना सहयोग दीजिए।
भारत की अर्थव्यवस्था में जब तक ज्यादा से ज्यादा भारतीयों का Financial Inclusion नहीं होगा, तब तक ये देश विकसित नहीं हो सकता।
Stock Market कोई जुआखाना नहीं है बल्कि जब आप Stock Market में Invest करते हैं, तब आपका पैसा भारत की Industries में जाता है, जिससे नई नौकरियाॅं व नए रोजगार Create होते हैं। इससे न केवल भारत की Industries का आर्थिक विकास होता है, बल्कि Companies की आर्थिक तरक्की के साथ ही आपके Share का Price भी बढ़ता है जिससे आपकी भी आर्थिक तरक्की होती है।
इसलिए जानिए, सीखिए और समझिए कि पैसा कैसे काम करता है और Bank FD व Property में Investment से थोड़ा ऊपर उठिए, Mutual Funds व Stock Market Investment के बारे में सोंचिए, सीखिए और सहयोग कीजिए। नहीं तो न आप कभी अपनी आर्थिक तंगी से निकल पाऐंगे न ही ये देश कभी आर्थिक रूप से विकसित हो पाएगा।